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भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल)। नगर पालिका चुनाव का बिगुल बज चुका है। भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों की सूची सामने आने के बाद 40 वार्डों में चुनावी घमासान शुरू हो गया है। प्रत्याशी प्रचार में उतर चुके हैं, लेकिन शहर के राजनीतिक गलियारों में वार्ड पार्षदों से ज्यादा चर्चा नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर हो रही है।
25 अगस्त को राज्य के एक प्रादेशिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के बाद आम मतदाताओं के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या इस बार बिना पार्षद का चुनाव लड़े कोई बाहरी व्यक्ति भी नगर पालिका अध्यक्ष बन सकता है? खबर के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं और अध्यक्ष पद को लेकर सस्पेंस और गहरा गया है।
सहायक रिटर्निंग अधिकारी ने कहा—अभी कोई निर्देश नहीं
इस पूरे मामले को लेकर भवानीमंडी नगर पालिका चुनाव के सहायक रिटर्निंग अधिकारी अब्दुल हफीज ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि बिना पार्षद का चुनाव लड़े किसी बाहरी व्यक्ति के नगर पालिका अध्यक्ष बनने के संबंध में निर्वाचन आयोग से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग से इस संबंध में कोई निर्देश प्राप्त होते हैं तो उनका अक्षरशः पालन किया जाएगा। अन्यथा पूर्व की नगर पालिका चुनाव प्रक्रिया के अनुसार पार्षदों द्वारा ही नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा।
वार्डों में मुकाबला, निगाह अध्यक्ष की कुर्सी पर
नगर पालिका चुनाव-2026 के तहत नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। भाजपा-कांग्रेस एवं निर्दलीय प्रत्याशियों को मिलाकर फिलहाल 122 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। हालांकि 3 सितंबर को नाम वापसी के बाद कितने प्रत्याशी मैदान में बचेंगे, यह तस्वीर साफ होगी।
4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित होंगे और 9 सितंबर को मतदान होगा। 14 सितंबर को मतगणना एवं चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
किसके सिर सजेगा ‘शहरी सत्ता’ का ताज?
इस बार असली राजनीतिक खेल सिर्फ 40 वार्डों की जीत-हार तक सीमित नहीं रहने वाला। हर दल की नजर इस बात पर होगी कि उसके कितने प्रत्याशी जीतकर नगरपालिका बोर्ड में पहुंचते हैं और इसके बाद अध्यक्ष पद के लिए क्या राजनीतिक समीकरण बनता है।
फिलहाल प्रत्याशी अपने-अपने वार्ड में वोट मांग रहे हैं, लेकिन मतदाताओं के बीच सवाल यही है—क्या अगला अध्यक्ष निर्वाचित पार्षदों में से होगा या फिर किसी ‘बाहरी चेहरे’ की एंट्री से नगरपालिका की राजनीति में नया अध्याय लिखा जाएगा?

