भवानीमंडी में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया गुरु हरगोबिन्द साहिब जी का प्रकाश पर्व

भवानीमंडी, 30 जून 2026 — स्थानीय गुरुद्वारा साहिब में सिक्खों के छठे गुरु और मीरी-पीरी के मालिक, साहिब श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब जी महाराज का पावन प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस विशेष धार्मिक समागम में भवानी मंडी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सिक्ख, सिंधी, पंजाबी और गुरु नानक नाम लेवा संगत ने शिरकत की।

धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति

​प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में बीते 18 जून से 29 जून तक श्री सुखमनी साहिब जी का लड़ीवार पाठ अनवरत रूप से आयोजित किया गया था। आज, 30 जून को सुबह 10:30 बजे निशान साहिब के चोले की सेवा की गई, जिसके बाद गुरु सिख परिवार की ओर से रखे गए श्री सप्ताह पाठ साहिब की समाप्ति (भोग) हुई।

​इस पावन अवसर पर हजूरी रागी भाई बलबीर सिंह जी एवं भाई हरकीरत सिंह जी के जत्थे द्वारा मनमोहक गुरबाणी शब्द-कीर्तन, नाम-बाणी और कथा-कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को निहाल किया गया। कार्यक्रम का समापन ‘सर्वत के भले’ (सबकी भलाई) की अरदास के साथ हुआ। इसके बाद संगत को मिस्सी रोटी और प्याज के विशेष अटूट लंगर का प्रसाद छकाया गया।

संत-सिपाही परंपरा के प्रणेता थे गुरु साहिब

​समागम के दौरान गुरुद्वारा साहिब के सचिव श्री अमनदीप सिंह जी ने गुरु साहिब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा:

​”गुरु हरगोबिन्द साहिब जी ने न केवल सिक्खों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाया, बल्कि अन्याय के सामने सिर न झुकाते हुए मानवता, सत्य और धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने की प्रेरणा भी दी।”

​मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में गुरगद्दी संभालने वाले गुरु हरगोबिन्द साहिब जी ने सिक्ख पंथ को आध्यात्मिक (पीरी) के साथ-साथ शौर्य (मीरी) का संदेश दिया। उन्होंने अकाल तख्त साहिब की स्थापना की, दो तलवारें धारण कीं और सिक्खों को ‘संत-सिपाही’ बनाया। उनके नेतृत्व में ही सिक्ख पंथ ने पहली बार मुगल अत्याचार के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध शुरू किया था।

युवाओं और विद्यार्थियों का सम्मान

​इस ऐतिहासिक दिन पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष श्री प्रीतपाल सिंह जी तथा पूर्व अध्यक्ष सरदार दर्शन सिंह जी द्वारा समाज के होनहार विद्यार्थियों एवं युवाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय संगत ने विभिन्न सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया।

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