कोटा रेल मंडल की अनूठी पहल: अब हर गुरुवार सीधे डीआरएम से मिल सकेंगे कर्मचारी और आम जनता, ब

जगदीश पोरवाल (जनसंदेश )

कोटा। कोटा रेल मंडल में पारदर्शिता और जनसुनवाई को बढ़ावा देने के लिए मंडल रेल प्रबंधक श्री अनिल कालरा के निर्देशन में एक बेहद सराहनीय और अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। अब अगर किसी रेलकर्मी या आम नागरिक की कोई समस्या महीनों से लंबित है, तो वे बिना किसी सिफारिश के हर गुरुवार को सीधे मंडल रेल प्रबंधक से मिलकर अपनी बात रख सकते हैं।

​वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने इस नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जायज समस्या फाइलों के नीचे दबी न रहे और शिकायतकर्ता को सर्वोच्च मंडल अधिकारी तक सीधी पहुंच मिले।

क्या है पूरी व्यवस्था और समय?

  • कर्मचारी और आम नागरिक: प्रत्येक गुरुवार सायं 5:00 बजे से 6:00 बजे तक सीधे डी आर एम से मुलाकात कर सकेंगे।
  • रेलवे ठेकेदार: रेलवे परियोजनाओं और विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए डीआरएम प्रत्येक गुरुवार सायं 4:00 बजे से 5:00 बजे तक ठेकेदारों की समस्याओं व शिकायतों की सुनवाई करेंगे।

पंजीकरण है अनिवार्य

​इस सुनवाई में शामिल होने के लिए पहले से पंजीकरण कराना आवश्यक होगा।

  1. कर्मचारी और आमजन के लिए नियम: शिकायतकर्ता के लिए यह जरूरी है कि वह पहले संबंधित शाखा अधिकारी या अपर मंडल रेल प्रबंधक स्तर पर अपनी समस्या प्रस्तुत कर चुका हो। इसके बाद ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत डीआरएम कार्यालय से मिलने का समय प्राप्त किया जा सकेगा।
  2. ठेकेदारों के लिए नियम: ठेकेदारों को अपनी शिकायतों के निवारण के लिए प्रत्येक मंगलवार सायं 4:00 बजे तक आवश्यक दस्तावेजों के साथ मंडल रेल प्रबंधक के निजी सचिव (PS) कार्यालय में अपना पंजीकरण कराना होगा।

गुरुवार को छुट्टी या व्यस्तता होने पर शुक्रवार को मिलेगा मौका

​रेल प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि यदि किसी सप्ताह अपरिहार्य कारणों या सरकारी अवकाश की वजह से गुरुवार को यह बैठक नहीं हो पाती है, तो शिकायतकर्ताओं को निराश होने की जरूरत नहीं है। उसी सप्ताह शुक्रवार को निर्धारित समय पर सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।

समयबद्ध समाधान और सीनियर डीपीओ करेंगे मॉनिटरिंग

​इस पहल को महज एक औपचारिकता न बनाकर परिणामोन्मुखी बनाया गया है। डीआरएम के समक्ष आने वाली शिकायतों पर संबंधित विभागों को एक तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई करनी होगी। इस पूरी व्यवस्था और शिकायतों की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी स्तर पर की जाएगी, ताकि शिकायतकर्ता को उसकी समस्या के समाधान की अपडेट मिलती रहे।

​रेल प्रशासन का मानना है कि ‘बिना सिफारिश सीधे संवाद’ की यह पहल प्रशासन, रेल कर्मचारियों और आम जनता के बीच विश्वास की एक नई कड़ी साबित होगी, जहाँ समस्याओं को न सिर्फ सुना जाएगा बल्कि उनका त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!