जनसंदेश (जगदीश पोरवाल )
झालावाड़, 14 जून। खरीफ मौसम 2026 की तैयारियों के तहत जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग ने किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए व्यापक तैयारी कर ली है। जिला कलक्टर की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में संतुलित उर्वरक उपयोग, विशेषकर सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) को बढ़ावा देने तथा उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष चर्चा की गई।
बैठक में संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए जिले की आवश्यकता के अनुसार 55 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 14 हजार मीट्रिक टन डीएपी, 40 हजार मीट्रिक टन एसएसपी तथा 9 हजार मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक की मांग कृषि आयुक्तालय को पूर्व में भेजी जा चुकी है। वर्तमान में जिले में सभी प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसानों को आवश्यकता अनुसार आपूर्ति की जा रही है।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप झालावाड़ राज्य में सर्वाधिक एसएसपी उपयोग करने वाला जिला बन गया है। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष एसएसपी के उपयोग में लगभग 1.75 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। एसएसपी के बढ़ते उपयोग से डीएपी पर निर्भरता कम हुई है, वहीं दलहनी एवं तिलहनी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण में भी सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
बैठक में उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए गए कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर उपलब्ध स्टॉक एवं मूल्य सूची का स्पष्ट प्रदर्शन करें, प्रत्येक बिक्री का बिल जारी करें तथा निर्धारित नियमों के अनुसार ही उर्वरकों का विक्रय करें। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन अथवा निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिला कलक्टर ने किसानों को निर्धारित दरों पर गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने, एसएसपी उर्वरक के उपयोग को और अधिक प्रोत्साहित करने, उर्वरकों की अवैध ढुलाई पर रोक लगाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आगामी 20 जून को जिला मुख्यालय पर किसान कार्यशाला आयोजित करने की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के छिड़काव पर प्रति हेक्टेयर 1000 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है, जिसके लिए किसान राज किसान पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित उर्वरक उपयोग और वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने की यह पहल किसानों की लागत कम करने, फसल उत्पादन बढ़ाने तथा भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

