जर्जर यात्री प्रतीक्षालय बना ‘खतरा’, जान जोखिम में डालकर बैठने को मजबूर यात्री

नगर पालिका ने की बैरिकेडिंग, भीषण गर्मी में छांव की तलाश यात्रियों को ले जा रही मौत के साये में

भवानीमंडी | शहर के बस स्टैंड पर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया यात्री प्रतीक्षालय इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। करीब 18 साल पुराने इस ढांचे की रोश (किनारों का हिस्सा) पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका प्रशासन ने चार दिन पूर्व प्रतीक्षालय के चारों ओर बांस की बैरिकेडिंग कर यात्रियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।

चेतावनी के बावजूद जोखिम में जान

​नगर पालिका ने प्रतीक्षालय के बाहर स्पष्ट चेतावनी नोटिस चस्पा किया है कि “इमारत क्षतिग्रस्त है, कृपया दूरी बनाए रखें।” लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से बचने के लिए हर समय 50 से 100 यात्री बैरिकेडिंग के भीतर बैठकर बसों का इंतजार कर रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि प्रशासन ने रोकने का इंतजाम तो कर दिया, लेकिन भीषण गर्मी में बैठने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है।

निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल

​प्रतीक्षालय की स्थिति ने सरकारी निर्माण की गुणवत्ता को कटघरे में खड़ा कर दिया है:

  • उद्घाटन: 31 अगस्त 2008 (तत्कालीन अध्यक्ष रामलाल गुर्जर का कार्यकाल)।
  • अधूरी मरम्मत: 2014 में छत की मरम्मत की गई थी, लेकिन रोश के हिस्से को तब छोड़ दिया गया था।
  • वर्तमान स्थिति: निर्माण के मात्र 6 साल बाद ही इसे मरम्मत की जरूरत पड़ी थी, जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

सोमवार से शुरू होगा कार्य

​नगर पालिका के जेईएन देवमित्र कानूनगो के अनुसार, प्रतीक्षालय की मुख्य छत सुरक्षित है, केवल रोश वाला हिस्सा ही जर्जर हुआ है। उन्होंने बताया:

​”फिलहाल विवाह सीजन के चलते मजदूरों की कमी थी, जिसके कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया। सोमवार से क्षतिग्रस्त रोश को हटाने और मरम्मत की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।”

मुख्य बिंदु:

  • खतरा: जर्जर रोश कभी भी गिर सकती है।
  • मजबूरी: वैकल्पिक छांव न होने से यात्री खतरे के बावजूद वहीं बैठ रहे हैं।
  • लापरवाही: 2014 की मरम्मत के दौरान किनारों को ठीक न करना बड़ी चूक मानी जा रही है।

​शहरवासियों की मांग है कि सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए जल्द से जल्द इसका समाधान किया जाए ताकि यात्री बिना किसी डर के बसों की प्रतीक्षा कर सकें।

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