कुप्रथा का त्याग: भवानीमंडी में मुंडन संस्कार पर बलि प्रथा छोड़ कराई गई भगवान की कथा


भवानीमंडी। समाज में व्याप्त पुरानी कुरीतियों को पीछे छोड़ते हुए मानवता और जीव दया की एक नई मिसाल पेश की गई है। स्थानीय निवासी श्री चंदर सिंह चौहान (मोगरा) ने अपने सुपौत्र के मुंडन संस्कार के पावन अवसर पर एक सराहनीय पहल की।

परंपरा में बदलाव, जीव दया का संदेश हरिपुरा स्थित श्री देवनारायण मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में श्री चौहान ने वर्षों से चली आ रही पुरानी परंपरा ‘बली प्रथा’ का पूर्णतः त्याग कर दिया। इस कुप्रथा के स्थान पर उन्होंने धार्मिक विधि-विधान से भगवान की कथा का आयोजन करवाया।

कथा के पश्चात सभी मेहमानों को प्रसाद के रूप में शुद्ध सात्विक भोजन करवाया गया।जीव दया समिति ने किया सम्मानसमाज को नई दिशा देने वाले इस कदम की चारों ओर प्रशंसा हो रही है। श्री चौहान के इस निर्णय का स्वागत करने के लिए जीव दया समिति के पदाधिकारी भी कार्यक्रम में पहुँचे।

​सम्मान समारोह: समिति के अध्यक्ष कालूलाल सालेचा, अभय कुमार चोरड़िया एवं अन्य पदाधिकारियों ने श्री चंदर सिंह चौहान का माला एवं दुपट्टा पहनाकर भव्य स्वागत किया।
​शुभकामनाएं: पदाधिकारियों ने इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया और बच्चे के उज्जवल भविष्य की मंगल कामना की।

​”समाज में बदलाव तभी आता है जब हम पुरानी और अमानवीय परंपराओं को छोड़कर धर्म के वास्तविक मार्ग को अपनाते हैं। चौहान परिवार का यह कदम जीव दया की दिशा में अनुकरणीय है।” — जीव दया समिति


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