झालावाड़ | 22 अप्रैल 2026
झालावाड़ रेलवे स्टेशन बुधवार को उस वक्त अचानक छावनी में तब्दील हो गया जब वहां ‘एयर स्ट्राइक’ जैसी आपातकालीन स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, यह वास्तव में किसी संकट की घड़ी नहीं, बल्कि जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक हाई-प्रोफाइल मॉक ड्रिल थी। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की प्रतिक्रिया, समय प्रबंधन और आपसी समन्वय को परखना था।

युद्ध स्तर पर चला बचाव कार्य
मॉक ड्रिल के दौरान स्टेशन परिसर में हवाई हमले के बाद की स्थिति का एक काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया। इसमें आगजनी, जनहानि और मलबे में फंसे लोगों का दृश्य दिखाया गया। सूचना मिलते ही पुलिस, सिविल डिफेंस, मेडिकल और फायर ब्रिगेड की टीमें सायरन बजाती हुई मौके पर पहुंचीं।
- सुरक्षा घेरा: पुलिस और सिविल डिफेंस के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की।
- रेस्क्यू ऑपरेशन: मलबे और प्रभावित क्षेत्र से घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
- त्वरित उपचार: मेडिकल टीमों ने मौके पर ही ‘ट्राइएज’ (घायलों की प्राथमिकता तय करना) किया और एम्बुलेंस के जरिए उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
- अग्नि शमन: फायर ब्रिगेड ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पाया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
कलेक्टर और एसपी ने स्वयं संभाली कमान
मॉक ड्रिल की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ और पुलिस अधीक्षक अमित कुमार तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने राहत कार्यों की बारीकी से मॉनिटरिंग की और मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
“इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वास्तविक आपदा के समय हमारा रिस्पांस टाइम न्यूनतम हो और समन्वय अधिकतम। आज की ड्रिल से हमारी तैयारियों की कमियों और मजबूती दोनों का आकलन हुआ है।”
— अजय सिंह राठौड़, जिला कलेक्टर
अधिकारियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण ड्रिल के दौरान प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें अतिरिक्त जिला कलेक्टर अनुराग भार्गव, जिला परिषद CEO शंभु दयाल मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद मीणा और डीएसपी हर्षराज सिंह खरेड़ा शामिल थे।
इस सफल आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि झालावाड़ का प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र किसी भी अप्रिय या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।

