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भवानीमंडी । (जगदीश पोरवाल )। राजस्थान विधानसभा में ‘जन विश्वास विधेयक 2026’ क्या पारित हुआ, इस विधायक को लेकर कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्रीमाल द्वारा एक व्यंग्यात्मक कार्टून बनाया गया है । जिसमे अपराधियों के चेहरों पर ऐसी चमक आई है ।ज। अब छोटे-मोटे अपराध करने के बाद आपको ‘सरकारी मेहमान’ बनकर जेल की रोटी तोड़ने की मेहनत नहीं करनी होगी। बस जेब ढीली कीजिए और ‘फ्री’ हो जाइए।
क्या है नया ‘सिस्टम’?
कार्टूनिस्ट अशोक ने हालात की सटीक नस पकड़ी है। अब पुलिस स्टेशन के बाहर “कैश काउंटर” और “पे एण्ड गो” के बोर्ड लगने की कल्पना की जा सकती है।
- जेल को कहिए ‘ना’: पहले बिना लाइसेंस भंडारण करने पर एक साल की जेल की हवा खानी पड़ती थी, अब 50 हजार रुपये दीजिए और मुस्कुराते हुए घर जाइए।
- पानी की चोरी? कोई बात नहीं: घरेलू कनेक्शन का व्यापारिक इस्तेमाल कर रहे हैं? पहले जेल का डर था, अब बस 200 से 1000 रुपये का ‘दैनिक चंदा’ (जुर्माना) दीजिए और काम चालू रखिए।
आम जनता बनाम ‘खास’ अपराधी
सरकार का तर्क है कि इससे मुकदमों का बोझ कम होगा और नागरिकों का विश्वास बढ़ेगा। लेकिन व्यंग्य यह है कि अब ‘अपराध’ अपराध नहीं, बल्कि एक ‘सब्सक्रिप्शन सर्विस’ जैसा नजर आने लगा है।
कार्टून में एक काल्पनिक अपराधी की खुशी दिखाई गई
“भाई, अब टेंशन नहीं है! पहले जेल जाने से इज्जत का कचरा होता था, अब तो बस चालान कटवाना है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे नो-पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने पर जुर्माना देकर हम खुद को वीआईपी समझने लगते हैं।” — एक काल्पनिक अपराधी की खुशी
कार्टून का निष्कर्ष
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल इसे ‘ऐतिहासिक कदम’ बता रहे हैं, और वाकई यह ऐतिहासिक है। कानून की किताब अब ‘जुर्माने की रेट लिस्ट’ बनती जा रही है। अगर आपकी जेब गरम है, तो ठंडी जेल आपके लिए नहीं है। अशोक जी का कार्टून साफ संदेश दे रहा है— कानून अब सजा नहीं, सीधे ‘कलेक्शन’ मांग रहा है।


