भवानीमंडी में परोपकार की अनुकरणीय मिसाल: स्व. नेमीचंद मेघवानी के नेत्रदान से दो दृष्टिहीनों का जीवन होगा रोशन

भवानीमंडी ( जगदीश पोरवाल )

नेत्रदान केवल दो आँखों का दान नहीं, बल्कि किसी अंधेरी दुनिया में उजाला भरने का पुनीत कार्य है। इसी उदात्त भावना को जीवंत करते हुए भवानीमंडी के मेघवानी परिवार ने समाज के सामने सेवा और परोपकार का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। नगर के वरिष्ठ वस्त्र व्यवसायी स्व. नेमीचंद मेघवानी के निधन के पश्चात उनके परिजनों ने नेत्रदान कराकर दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन को नई रोशनी प्रदान की है।

​यह भवानीमंडी से हुआ 164वाँ नेत्रदान है। उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पूर्व स्व. नेमीचंद जी की पत्नी स्व. चंदा देवी मेघवानी का भी नेत्रदान संपन्न हुआ था।

महिला ने स्वयं पहल कर पेश की मिसाल

नेमीचंद जी के निधन के उपरांत उनकी पुत्रवधू श्वेता मेघवानी ने संवेदनशीलता और जागरूकता दिखाते हुए अपने पति दीपक मेघवानी के सामने ससुर जी के नेत्रदान की इच्छा जताई। पति व परिजनों की सहमति के बाद इस पुनीत कार्य की प्रक्रिया शुरू की गई। स्व. नेमीचंद जी के पुत्र दीपक एवं पुत्रवधू श्वेता मेघवानी ने बताया कि उनके पिता अत्यंत धार्मिक एवं परोपकारी प्रवृत्ति के थे। माता जी के नेत्रदान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, इसलिए अंतिम समय में भी उनकी आँखों से किसी का जीवन संवर सके, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

तेज़ बुखार में भी डॉ. कुलवंत गौड़ ने निभाया फर्ज

भारत विकास परिषद के नेत्रदान प्रभारी एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नगर संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि परिजनों की सहमति के बाद राजेश गुप्ता कानूनगो ने संस्थान को सूचित किया। सूचना मिलते ही शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़, स्वयं तेज़ वायरल बुखार से पीड़ित होने के बावजूद, मानव सेवा के संकल्प के साथ अपने साथी मुकेश पांचाल को लेकर रात्रि में ही भवानीमंडी पहुँचे। उन्होंने परिजनों की उपस्थिति में देर रात 11 बजे नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण की। इस कार्य में प्रकाश सीए, अरुण गर्ग तथा पौत्र तनिष्क व पुलकित मेघवानी का सराहनीय सहयोग रहा।

भवानीमंडी में परंपरा बन रहा नेत्रदान

भवानीमंडी आज पूरे राजस्थान में नेत्रदान के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। कमलेश गुप्ता दलाल के अनुसार, नगर में अब तक 17 ऐसे परिवार सामने आ चुके हैं जहाँ एक से अधिक सदस्यों का नेत्रदान हुआ है। शोक की इस घड़ी में भी स्वतः आगे आकर नेत्रदान करने की यह पहल भवानीमंडी को परोपकार का केंद्र बना रही है।

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