झालावाड़ जिले के किसानों को अब खाद के लिए नहीं लगानी होगी लम्बी लाइने ‘ 27 अगस्त को पचपहाड़ में आयोजित होगा जिला स्तरीय कार्यक्रम ।

कृषि विभाग की नई एफएफएस व्यवस्था से उर्वरक वितरण में आएगी पारदर्शिता, किसानों को मिलेगा समय पर खाद

झालावाड़ 26 अगस्त। ( जगदीश पोरवाल ) जिले में किसानों को उर्वरक के लिए दुकानों एवं वितरण केन्द्रों पर लंबी कतारों में लगने की परेशानी से राहत दिलाने तथा उर्वरकों के पारदर्शी एवं सुगम वितरण के लिए कृषि विभाग द्वारा फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (एफएफएस) व्यवस्था लागू की जा रही है। इस नई डिजिटल व्यवस्था का शुभारंभ 27 अगस्त को पचपहाड़ में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत किसान अपने मोबाइल फोन में उपलब्ध एफएफएस ऐप के माध्यम से घर बैठे उर्वरकों की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। किसान अपनी फार्मर आईडी अथवा आधार संख्या के माध्यम से लॉगिन कर नजदीकी पंजीकृत विक्रेताओं के पास उपलब्ध यूरिया, डीएपी, एनपीके सहित अन्य उर्वरकों के स्टॉक की जानकारी प्राप्त कर अपनी आवश्यकता के अनुसार ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

उर्वरक वितरण व्यवस्था होगी अधिक पारदर्शी

संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), झालावाड़ डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में एफएफएस ऐप डाउनलोड कर इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि एफएफएस प्रणाली के माध्यम से किसानों को उनकी आवश्यकता एवं पात्रता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। साथ ही उर्वरकों के असंतुलित उपयोग पर नियंत्रण तथा फसल एवं भूमि की आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की तकनीकी अथवा व्यावहारिक समस्या आने पर किसान अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी, कृषि पर्यवेक्षक अथवा जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। पचपहाड़ में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में किसानों, उर्वरक विक्रेताओं एवं कृषि विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एफएफएस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा।

एफएफएस प्रणाली के प्रमुख लाभ

  • उर्वरकों की कालाबाजारी एवं अनधिकृत बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण होगा।
  • उद्योगों एवं अन्य गैर-कृषि कार्यों में उर्वरकों के अनावश्यक उपयोग पर रोक लगेगी।
  • किसानों को उनकी आवश्यकता एवं पात्रता के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे।
  • उर्वरक वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित होगी।
  • फसल एवं भूमि की आवश्यकता के अनुरूप संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
  • वास्तविक किसानों तक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी तथा कृत्रिम कमी की स्थिति को रोकने में मदद मिलेगी।

बिना मांग के उर्वरक थोपने पर होगी कार्रवाई

कृषि विभाग द्वारा उर्वरक कंपनियों एवं विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है कि किसानों की मांग के बिना उन्हें अनावश्यक रूप से अन्य उत्पादों के साथ उर्वरक खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाए। यदि कोई किसान केवल यूरिया अथवा डीएपी की मांग करता है तो उसके साथ अन्य उत्पादों की खरीद को अनिवार्य नहीं किया जा सकेगा। ऐसा करने वाले उर्वरक विक्रेताओं एवं संबंधित कंपनियों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक विक्रेता इसके लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे।

शिकायत मिलने पर होगी त्वरित कार्रवाई

एफएफएस प्रणाली में यदि किसान द्वारा जारी टोकन के आधार पर उर्वरक विक्रेता के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद किसान को उर्वरक उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित विक्रेता के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग द्वारा किसानों की शिकायतों का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसानों को जारी टोकन के अनुरूप निर्धारित समय पर पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध हो सके और किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

नोट – चित्र AI द्वारा निर्मित काल्पनिक है ।

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