वार्ड आरक्षण लॉटरी में पचपहाड़ क्षेत्र के सामान्य वर्ग को झटका; वरिष्ठ अधिवक्ता व्यास बोले—’भेदभाव खत्म हो, पचपहाड़ की पृथक लॉटरी डाली जाए’

​भवानीमंडी। (जगदीश पोरवाल )भवानीमंडी नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत पचपहाड़ क्षेत्र के 11 वार्डों (वार्ड संख्या 5 से 15) के लिए हाल ही में संपन्न हुई वर्ष 2026 की वार्ड आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया के बाद सामान्य वर्ग के स्थानीय निवासियों और दावेदारों में गहरा असंतोष व्याप्त है। वर्ष 2020 की तुलना में इस बार सामान्य वर्ग के पुरुष एवं महिला—दोनों श्रेणियों में एक-एक वार्ड की कटौती दर्ज की गई है।

​मामले में अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता स्वतंत्र कुमार व्यास ने कहा कि निकाय आरक्षण लॉटरी में सामान्य वर्ग के साथ साफ तौर पर भेदभाव बरता गया है। उन्होंने कहा,

“पचपहाड़ के 11 वार्डों में से केवल वार्ड संख्या 9 को सामान्य वर्ग पुरुष के लिए रखा गया है, और उस पर भी अन्य आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार आकर अपना दावा ठोक देते हैं। ऐसे में सामान्य वर्ग का पुरुष उम्मीदवार आखिर कहां जाए? इस प्रकार का भेदभाव पूरी तरह से खत्म होना चाहिए।”

​अधिवक्ता व्यास ने मांग रखी कि पचपहाड़ के भौगोलिक और सामाजिक स्वरूप को देखते हुए इसके सभी 11 वार्डों के लिए अलग से आरक्षण लॉटरी निकाली जानी चाहिए थी, ताकि सामान्य वर्ग को न्यायोचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

​वर्ष 2020 बनाम वर्ष 2026:

आरक्षण का तुलनात्मक गणित
​लॉटरी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2026 में पचपहाड़ क्षेत्र (वार्ड 5 से 15) का वार्डवार स्वरूप इस प्रकार बदला है:

​वर्ष 2020 का आरक्षण विवरण:
​सामान्य वर्ग (कुल 6):
​पुरुष (2): वार्ड संख्या 8, 11
​महिला (4): वार्ड संख्या 7, 12, 13, 14

​अन्य पिछड़ा वर्ग – OBC (कुल 3):
​पुरुष (1): वार्ड संख्या 6
​महिला (2): वार्ड संख्या 9, 10

​अनुसूचित जाति – SC (कुल 2):
​पुरुष (1): वार्ड संख्या 5
​महिला (1): वार्ड संख्या 15

​वर्ष 2026 का नया आरक्षण विवरण:

​सामान्य वर्ग (कुल 4):
​पुरुष (1): वार्ड संख्या 9
​महिला (3): वार्ड संख्या 6, 10, 13

​अन्य पिछड़ा वर्ग – OBC (कुल 5):
​पुरुष (3): वार्ड संख्या 7, 12, 14
​महिला (2): वार्ड संख्या 8, 11

​अनुसूचित जाति – SC (कुल 2):
​पुरुष (1): वार्ड संख्या 5
​महिला (1): वार्ड संख्या 15

​वर्ष 2020 में सामान्य वर्ग के पास कुल 6 सीटें (2 पुरुष व 4 महिला) थीं, जो वर्ष 2026 में घटकर मात्र 4 सीटें (1 पुरुष व 3 महिला) रह गई हैं। सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व में आई इस कमी और स्थानीय प्रबुद्धजनों के विरोध के बाद क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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