झ
- जन्मजात रुकावट से मात्र 27% रह गई थी किडनी की कार्यक्षमता, डॉ. विशाल नेनीवाल की टीम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से किया जटिल ऑपरेशन।
झालावाड़, 03 अक्टूबर।
एसआरजी चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज, झालावाड़ के यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने एक 6 वर्षीय मासूम बालक का एडवांस लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से सफल ऑपरेशन कर उसकी किडनी को पूरी तरह खराब होने से बचा लिया है। झालावाड़ निवासी 6 वर्षीय गर्वित की प्रभावित किडनी जन्मजात रुकावट के कारण मात्र 27 प्रतिशत ही काम कर रही थी।
यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल नेनीवाल ने बताया कि बालक बीते दो वर्षों से पेट दर्द, उल्टी, कमजोरी और वजन घटने की समस्या से जूझ रहा था। जांच में पाया गया कि किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट के जंक्शन पर जन्मजात रुकावट (पेलविउरेटरिक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन) थी। इसके कारण पेशाब का बहाव रुक रहा था और किडनी पर दबाव बढ़ रहा था।
3 से 4 घंटे चला जटिल ऑपरेशन
कम उम्र के कारण यह सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी। परिजनों की सहमति के बाद डॉ. नेनीवाल के नेतृत्व में करीब 3 से 4 घंटे तक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने आधुनिक दूरबीन तकनीक से रुकावट को हटाकर किडनी को पुन: पेशाब की नली से जोड़ दिया। बिना बड़ा चीरा लगाए हुए इस ऑपरेशन से बालक को कम दर्द हुआ और वह तेजी से रिकवर कर रहा है।
चिकित्सा टीम का योगदान
इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. राजन नन्दा, डॉ. आलोक, एनेस्थीसिया टीम सहित कीर्ति मित्तल, दिलीप कलाल, मुकेश सांवरिया और तूफान का विशेष सहयोग रहा। अस्पताल प्रबंधन ने सफल ऑपरेशन के लिए पूरी मेडिकल टीम के समन्वित प्रयासों की सराहना की है।

