झालावाड़, ( जगदीश पोरवाल )13 जुलाई।
झालावाड़ जिले में छात्र-छात्राओं को विद्यालय लाने-ले जाने वाले वाहनों (बाल वाहिनियों) में सुरक्षा मानकों और नियमों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित की जाएगी। सोमवार को मिनी सचिवालय सभागार में जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न निजी व राजकीय विद्यालयों के संचालक, प्रतिनिधि और जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में एसपी अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों और संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
दागी और बिना सत्यापन वाले चालकों पर गिरेगी गाज
पुलिस अधीक्षक ने जिला परिवहन अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जिले में संचालित सभी स्कूली बसों के चालकों की सूची तैयार कर उनके ड्राइविंग लाइसेंस, लंबित मुकदमों और पुराने चालानों का गहन सत्यापन किया जाए। एसपी ने सख्त लहजे में कहा कि जिन चालकों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। इसके साथ ही नियमों की पालना परखने के लिए रोजाना रैंडम आधार पर 15-15 बसों की औचक जांच करने का अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।
बसों में सीसीटीवी, जीपीएस और फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य
बैठक में जिला परिवहन अधिकारी समीर जैन ने बाल वाहिनी संचालन से जुड़े अनिवार्य नियमों की जानकारी दी:
- सुरक्षा उपकरण: प्रत्येक स्कूली बस में सीसीटीवी कैमरे और मानकों के अनुरूप जीपीएस सिस्टम लगा होना अनिवार्य है।
- अनुभवी चालक: बस चालक के पास कम से कम 5 वर्ष पुराना हैवी ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है।
- पहचान व हेल्पलाइन: बस पर चालक का नाम, स्कूल प्रतिनिधि का नाम और हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए।
- ड्रेस कोड व फिटनेस: चालकों के लिए तय वर्दी पहनना अनिवार्य होगा। साथ ही सभी बसों का वैध फिटनेस प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
शराब पीकर वाहन चलाने पर पूर्ण रोक
प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी चालक शराब का सेवन कर वाहन नहीं चलाएगा। इसके अलावा, बच्चों को बस में चढ़ाने और उतारने के लिए सुरक्षित स्थान तय करने तथा बिना वैध परमिट के किसी भी लोक परिवहन बस का उपयोग बाल वाहिनी के रूप में न करने की हिदायत दी गई है।
एसपी अमित कुमार ने सभी स्कूल प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे बच्चों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए इन मानकों की नियमित रूप से खुद भी निगरानी करें।

