झालरापाटन से पहली बार रेल मार्ग से भेजा गया 2688 टन गेहूं, कोटा रेल मंडल को मिली बड़ी सफलता

कोटा/झालावाड़। जगदीश पोरवाल (जनसंदेश )

कोटा रेल मंडल के व्यापार विकास प्रयासों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों को एक बड़ी सौगात देते हुए आईटीसी (ITC) लिमिटेड द्वारा पहली बार झालरापाटन गुड्स शेड से 42 बीसीएन वैगनों में 2688 टन गेहूं की पूरी रेल रैक का लदान कर बादली (दिल्ली क्षेत्र) के लिए रवाना किया गया। इस ऐतिहासिक परिवहन से रेलवे को ₹22,18,675 का मालभाड़ा प्राप्त हुआ है।

​पहले केवल होता था सोयाबीन खली का परिवहन

​गौरतलब है कि अब तक झालरापाटन गुड्स शेड से केवल डी-ऑयल्ड केक (सोयाबीन खली) का ही रेल परिवहन होता था। गेहूं की पहली रैक के इस सफल संचालन से अब झालरापाटन एवं आसपास के क्षेत्रों के किसानों, व्यापारियों तथा कृषि उत्पाद खरीदने वाली बड़ी संस्थाओं को रेलमार्ग से भारी मात्रा में अनाज भेजने की एक नई और सुलभ सुविधा मिल गई है।

​इन रास्तों से होकर गुजरी पहली रैक

​वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने बताया कि इस रैक में कुल 2688 टन गेहूं लदा है। इसे झालरापाटन से रवाना कर सवाई माधोपुर, मथुरा जंक्शन एवं तुगलकाबाद के रास्ते होते हुए बादली भेजा गया है।

​सड़क मार्ग की तुलना में रेल परिवहन के फायदे:

  • किफायती और सुरक्षित: रेलमार्ग से माल का परिवहन सड़क मार्ग की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय है।
  • लागत और समय की बचत: एक साथ हजारों टन माल का परिवहन होने से व्यापारियों की परिवहन लागत कम होती है और समय की बड़ी बचत होती है।
  • पर्यावरण संरक्षण: सड़क मार्ग पर भारी वाहनों की निर्भरता कम होने से प्रदूषण घटेगा और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।

​क्षेत्रीय कृषि और व्यापार को मिलेगी नई गति

​इस नई पहल से झालावाड़ एवं आसपास के कृषि क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज देश के बड़े उपभोग और व्यापारिक केंद्रों तक आसानी से पहुंचाने का बेहतर विकल्प मिलेगा। स्थानीय व्यापारियों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और कंपनियों को कम लागत में एक साथ बड़ी मात्रा में माल भेजने की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे कृषि उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और मजबूत होगी।

भविष्य की राह: रेल प्रशासन उद्योगों, व्यापारिक संस्थानों एवं कृषि क्षेत्र के साथ निरंतर तालमेल बिठाकर नई वस्तुओं के रेल परिवहन को प्रोत्साहित कर रहा है। झालरापाटन से गेहूं की पहली रैक का चलना इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, जिससे भविष्य में अन्य कृषि एवं औद्योगिक उत्पादों के रेल परिवहन की संभावनाएं और अधिक मजबूत होंगी।

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