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झालावाड़, 17 अक्टूबर:
रबी फसल बुवाई सीजन के दौरान किसानों को तय दरों पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और कालाबाजारी रोकने के लिए कृषि विभाग ने शिकंजा कस दिया है। इसी कड़ी में विभाग की टीम ने डग एवं चौमहला क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर गोदामों और विक्रय परिसरों की सघन जांच की। अनियमितताएं पाए जाने पर एक फर्म के खिलाफ पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है, जबकि चार अन्य विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
प्रमुख बिंदु:
- फर्म के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज: डग-चौमहला क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान मैसर्स अवन्तिका एंटरप्राइजेज, दूधालिया में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं। फर्म पर अवैध रूप से उर्वरक बेचने, बिना रिकॉर्ड वितरण करने, पॉस (POS) मशीन में फर्जी प्रविष्टियां करने और बिना ‘ओ’ फॉर्म के उर्वरक बेचने के आरोप हैं। इसके अलावा 20.25 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया के विक्रय में अनियमितता मिलने पर दूधालिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
- चार विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित: स्टॉक रजिस्टर और मूल्य सूची प्रदर्शित नहीं करने, किसानों को पक्का बिल न देने, तय दर से अधिक दाम वसूलने तथा पॉस मशीन व भौतिक स्टॉक में अंतर मिलने पर चार विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इनमें किसान कृषि सेवा केंद्र, सोलंकी कृषि सेवा केंद्र, श्री निकुंज एग्रो एसोसिएट्स और श्रीजी ट्रेडर्स (डग) शामिल हैं।
- टैगिंग पर सख्त रोक: कृषि विस्तार संयुक्त निदेशक डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया है कि कोई भी विक्रेता या सहकारी समिति किसानों को उर्वरक के साथ अन्य उत्पाद (जैसे कीटनाशक या टॉनिक) खरीदने के लिए बाध्य (टैगिंग) नहीं कर सकती। ऐसा करने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी।
जिले में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक
कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान में जिले में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है:
- यूरिया: 13,549 मीट्रिक टन
- डीएपी: 3,934 मीट्रिक टन
- एनपीके: 4,254 मीट्रिक टन
- एसएसपी: 17,498 मीट्रिक टन
तिलहन और दलहनी फसलों के लिए एसएसपी का उपयोग फायदेमंद
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि तिलहनी (सोयाबीन, सरसों, तिल, अलसी) और दलहनी (चना, मूंग, उड़द, मसूर, मटर आदि) फसलों के लिए डीएपी की जगह तीन बैग सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) और एक बैग यूरिया का मिश्रण बेहद उपयोगी है। इससे नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर, जिंक और कैल्शियम की बेहतर उपलब्धता होती है, साथ ही इसमें मौजूद कैल्शियम मृदा (मिट्टी) सुधारक के रूप में भी प्रभावी कार्य करता है।
