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भवानीमंडी: ( जगदीश पोरवाल )
”अंगदान महादान” की कहावत को भवानीमंडी के एक परिवार ने चरितार्थ कर दिखाया है। भवानीमंडी के वस्त्र व्यवसायी हरीश जेसवानी ने इंदौर में समाज के सामने संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का एक अप्रतिम उदाहरण पेश किया है। इंदौर में अपनी बहन के असमय निधन के दुखद क्षणों में भी उन्होंने धैर्य बनाए रखा और परिवार को प्रेरित कर बहन का नेत्रदान करवाया। इस पुनीत कार्य से अब दो दृष्टिहीन लोगों की जिंदगी में नया उजाला फैलेगा।
नेत्रदान प्रभारी कमलेश गुप्ता दलाल ने जानकारी देते हुए बताया कि भवानीमंडी निवासी हरीश जेसवानी की बहन आरती मोटवानी का इंदौर के एक निजी चिकित्सालय में हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कारण निधन हो गया था। इस गहरे शोक की घड़ी में भी हरीश जेसवानी ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी बहन की अंतिम इच्छा व भवानीमंडी के नेत्रदान अभियानों से मिली प्रेरणा को याद रखा। उन्होंने आरती के पति गोवर्धनदास मोटवानी और पुत्र पवन मोटवानी को नेत्रदान के महत्व के बारे में समझाया और इस नेक कार्य के लिए सहमत किया।
परिवार की सहमति मिलते ही देर रात शंकरा नेत्रालय की टीम को सूचित किया गया। शंकरा नेत्रालय की मेडिकल टीम ने तड़के 4:00 बजे इंदौर के अस्पताल पहुंचकर पूरी प्रक्रिया को सम्मानपूर्वक संपन्न किया और नेत्रदान प्राप्त किया।
शंकरा नेत्रालय के डॉ. अनिल गोरे ने बताया कि मृतका का कॉर्निया पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है। इसे शीघ्र ही दो दृष्टिहीन रोगियों में प्रत्यारोपित किया जाएगा, जिससे उनके जीवन का अंधकार दूर होगा और वे दुनिया की खूबसूरती को देख सकेंगे।
दुख के सबसे कठिन क्षणों में लिया गया मोटवानी और जेसवानी परिवार का यह फैसला न केवल आरती जी की यादों को अमर कर गया, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश दे गया कि जाते-जाते भी किसी की जिंदगी रोशन की जा सकती है। परिवार की इस पहल की भवानीमंडी और इंदौर क्षेत्र में भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है।
