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वार्ड बॉय एवं गार्ड्स को तनाव प्रबंधन, मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार तथा आत्महत्या रोकथाम के लिए किया जागरूक
झालावाड़, 26 सितम्बर। ( जगदीश पोरवाल ) । एसआरजी अस्पताल, झालावाड़ में कार्यरत वार्ड बॉय एवं गार्ड्स के लिए कार्यस्थल पर तनावमुक्ति, संवेदनशील व्यवहार एवं आत्महत्या रोकथाम विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला नोडल अधिकारी, मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट डॉ. रश्मि गुप्ता ने कर्मचारियों को कार्यस्थल पर तनाव के प्रमुख कारणों, तनाव से निपटने के अनुचित एवं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले तरीकों तथा तनाव प्रबंधन के स्वस्थ एवं उचित उपायों के बारे में जानकारी दी।
डॉ. रश्मि गुप्ता ने कर्मचारियों को तनाव को पहचानने, उसके कारणों को समझने तथा स्वस्थ तरीके से उसका प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर सकारात्मक सोच एवं संतुलित व्यवहार अपनाकर तनाव को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है तथा इससे कार्यक्षमता और आपसी व्यवहार में भी सुधार होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान प्रधान डॉ. अशोक शर्मा ने की। इस दौरान डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. सुमित हाड़ा एवं डॉ. प्रतिभा मीणा भी उपस्थित रहे।
‘क्षमा पेटी’ के माध्यम से नकारात्मक भावनाओं से मुक्त होने का संदेश
संस्थान प्रधान डॉ. अशोक शर्मा ने ‘क्षमा पेटी’ की अवधारणा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक मनोवैज्ञानिक एवं चिकित्सीय पहल है, जिसके माध्यम से व्यक्ति गुस्सा, नाराजगी, मन की कड़वाहट एवं भावनात्मक चोट जैसी नकारात्मक भावनाओं को समझने तथा उनसे मुक्त होने का प्रयास कर सकता है। उन्होंने कहा कि नकारात्मक भावनाओं को मन में दबाकर रखने के बजाय उन्हें प्रतीकात्मक रूप से ‘क्षमा पेटी’ में डालकर छोड़ने से मानसिक बोझ कम करने एवं मन की शांति बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
इस अवसर पर वार्ड बॉय एवं गार्ड्स को अस्पताल में आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों के प्रति संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण एवं सम्मानजनक व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि अस्पताल में सहयोगपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण बनाने में कर्मचारियों का व्यवहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आत्महत्या रोकथाम के लिए दिया गेटकीपर प्रशिक्षण
कार्यक्रम में डॉ. राशिद द्वारा आत्महत्या रोकथाम के उद्देश्य से गेटकीपर प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को संकट की स्थिति से गुजर रहे व्यक्ति की पहचान करने, उसके साथ संवेदनशीलता एवं सहानुभूति के साथ संवाद करने तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर उचित सहायता एवं सहयोग उपलब्ध कराने के संबंध में जागरूक किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य अस्पताल कर्मियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संकट के शुरुआती संकेतों के प्रति सजग बनाते हुए जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए सक्षम करना रहा।
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