सार्वजनिक भूमियों पर संकट: भैसोदा के पूर्व सरपंच ने चेताया, कहा– “मौन रहे जनप्रतिनिधि तो जनता कभी माफ नहीं करेगी”


भैंसोदा /भैसोदामंडी ( जगदीश पोरवाल )नगर परिषद भैसोदा के अंतर्गत आने वाले भैसोदामंडी क्षेत्र में सार्वजनिक उपयोग की भूमियों के संरक्षण को लेकर अब अपनों ने ही आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सरपंच ने सोशल मीडिया पर एक बेहद संवेदनशील और विचारणीय पोस्ट साझा करते हुए स्थानीय प्रशासन, कॉलोनाइजरों की कार्यप्रणाली और राजनीतिक नेतृत्व की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि समय रहते भैसोदामंडी की सरकारी व सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब भवानीमंडी (राजस्थान) की तरह यहाँ भी सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों के लिए लोगों को नगर से दूर जाना पड़ेगा।

पड़ोसी शहर भवानीमंडी से तुलना और पानी की टंकी का उदाहरण

वरिष्ठ नेता ने पड़ोसी राज्य राजस्थान की भवानीमंडी नगरपालिका का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां सरकारी जमीनों के अभाव में विकास कार्यों को शहर से दूर ले जाना पड़ा है। उन्होंने वर्तमान में भैसोदामंडी के लिए रेलवे फाटक के पार बन रही पेयजल की टंकी का हवाला देते हुए कहा कि यह इस गंभीर समस्या का प्रत्यक्ष प्रमाण है। नगर के भीतर जमीन न होने के कारण जनता के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं को भी दूर दराज के इलाकों में ले जाना पड़ रहा है, जिससे भविष्य में आम नागरिकों को भारी असुविधा होगी।

कॉलोनी विकास नियम 2021′ के उल्लंघन का आरोप: जनता से वसूली, कॉलोनाइजरों को छूट?

पूर्व सरपंच ने मध्य प्रदेश के ‘कॉलोनी विकास नियम 2021’ का हवाला देते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) नीमच से स्वीकृत कॉलोनियों में हो रही अनियमितताओं को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

नियम क्या कहता है: नियम क्रमांक 24, खंड 5 की प्रस्तावना (क), (ख) और (ग) में यह साफ प्रावधान है कि यदि कॉलोनाइजर विकास कार्य पूरे नहीं करता है, तो सक्षम अधिकारी उसकी शेष बची अबिक्रीत (निजी व सार्वजनिक) भूखंडों को राजसात (सरकारी नियंत्रण में लेना) कर सकता है। इन भूखंडों के जरिए कॉलोनी में नागरिक अधोसंरचना और विकास कार्य पूरे कराए जाने चाहिए।

धरातल पर क्या हो रहा है: प्रशासनिक अमला नियमों का पालन केवल आम जनता से विकास शुल्क वसूलने तक ही सीमित रख रहा है। कॉलोनाइजरों पर लागू होने वाले कड़े नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसका फायदा उठाकर कॉलोनाइजर अपनी बची हुई जमीनों को धड़ल्ले से बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।
“सिस्टम की ताकत का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए हो रहा है, जबकि सार्वजनिक हित सर्वोपरि होना चाहिए, न कि निजी हित!”
— पूर्व सरपंच, भैसोदा

पक्ष और विपक्ष की ‘तटस्थता’ पर तीखा प्रहार

राजनैतिक जीवन में पद की अभिलाषा को मानवीय गुण मानते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों को आईना भी दिखाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यदि प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहता है, तो चाहे सत्तापक्ष हो या विपक्ष, दोनों का यह दायित्व है कि वे एक आम नागरिक की तरह जनहित में खुलकर आवाज उठाएं। नगर के भविष्य और सार्वजनिक भूमि जैसे गंभीर विषयों पर जनप्रतिनिधियों का मौन रहना या तटस्थ बने रहना किसी भी स्थिति में बुद्धिमानी नहीं है। अगर आज वे चुप रहे, तो जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।

सुशासन की छवि पर लग सकता है दाग

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश और नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को टैग करते हुए प्रशासन से मांग की है कि कॉलोनाइजरों द्वारा किए जा रहे भूखंडों के बिक्री पंजीयन (रजिस्ट्री) पर तुरंत रोक लगाई जाए। उन्होंने अंदेशा जताया है कि यदि इस गंभीर समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो प्रदेश सरकार की ‘सुशासन’ वाली छवि को भी ठेस पहुंच सकती है।

यह मामला अब केवल राजनीति का नहीं, बल्कि भैसोदामंडी के भविष्य और आम जनता के प्रति सार्वजनिक जवाबदेही का बन चुका है। अब देखना यह है कि इस मुखर आवाज के बाद प्रशासन और स्थानीय राजनेता इस विषय पर अपनी क्या स्थिति स्पष्ट करते हैं।

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