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जगदीश पोरवाल
प्रदेश में राजनीति का पारा एक बार फिर से ‘अलर्ट मोड’ पर आ गया है। आम जनता अभी मानसून की बारिश का इंतजार ही कर रही थी कि सरकार ने ‘ओबीसी आयोग के सर्वे’ की ऐसी बौछार कर दी है, जिसने नेताओं की सूखी उम्मीदों में हरी घास उगा दी है। खबर है कि प्रदेश में लंबे समय से अटके पड़े निकाय और पंचायतीराज चुनाव में ओबीसी आरक्षण का फॉर्मूला सेट करने के लिए घर-घर ‘डिजिटल सर्वे’ शुरू हो गया है।
अब सर्वे तो बंद दरवाजों के पीछे डेटा जुटाने के लिए हो रहा है, लेकिन इसका असली धमाका नेताओं के दिलों और दिमागों में सुनाई दे रहा है।
नेताओं की ‘जोड़-तोड़’ और ‘जनसंपर्क’ एक्सप्रेस चालू
प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट अशोक ने अपने कार्टून के जरिए इस चुनावी हलचल की सटीक ‘एक्स-रे रिपोर्ट’ पेश की है। जैसे ही राज्य सरकार ने सर्वे की तारीखों (10 जुलाई से 23 जुलाई) का ऐलान किया, वैसे ही प्रदेश के भावी पार्षदों, सरपंचों और ‘वार्ड-वीरों’ ने जनता के सुख-दुख में जबरन शरीक होना शुरू कर दिया है।
एक तरफ जहां सर्वे टीम पेन और टैबलेट लेकर घर का पता पूछ रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय नेताजी कुर्ता-पायजामा चमकाकर अभी से “टिकट के लिए जोड़-तोड़” में लग गए हैं। दूसरे नेताजी तो दो कदम आगे बढ़कर वार्डों में “जनसंपर्क” (यानी हाथ जोड़ने के अभ्यास) पर भी निकल चुके हैं। जनता हैरान है कि जो नेताजी पिछले पांच साल से ‘नॉट रीचेबल’ थे, वो आज अचानक गली के नुक्कड़ पर चाय पीने का न्योता क्यों दे रहे हैं!
तबादलों का तड़का और हाईकोर्ट का डंडा
एक तरफ हाईकोर्ट का आदेश है कि 31 जुलाई तक चुनाव की तारीख तय करो, तो दूसरी तरफ सरकार ने 19 जून से 10 जुलाई तक धड़ाधड़ तबादले (ट्रांसफर) खोल रखे थे। आलम यह है कि जो अधिकारी कल तक सर्वे की ट्रेनिंग ले रहा था, आज उसका ट्रांसफर लेटर हाथ में है!
अब आयोग के सचिव साहब मुख्य सचिव को पत्र लिखकर गुहार लगा रहे हैं—”प्रभु! कम से कम 23 जुलाई तक इन कर्मचारियों को अपनी कुर्सी से मत हिलाओ, वरना घर-घर सर्वे की जगह अधिकारी खुद अपना नया घर ढूंढते नजर आएंगे!”
आज की ताजा राजनीतिक सीख:
सर्वे की रिपोर्ट तो 23 जुलाई के बाद बंद लिफाफे में सरकार को सौंपी जाएगी, लेकिन नेताओं ने अपनी ‘अंडरग्राउंड रिपोर्ट’ और गोटियां बिठाना आज से ही शुरू कर दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि सर्वे की रिपोर्ट पहले आती है या नेताओं का सब्र पहले जवाब देता है!

