भवानीमंडी (जनसंदेश/जगदीश पोरवाल)।
रेलवे से तत्काल टिकट बनवाना अब यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने जैसा नहीं रहेगा। तत्काल टिकट के लिए रात-रात भर स्टेशन पर सोने और आरक्षण खिड़की पर पहले फॉर्म रखने की होड़ अब खत्म होने जा रही है। पश्चिम मध्य रेल प्रशासन ने तत्काल आरक्षण के लिए टोकन वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था 01 अगस्त 2026 से कोटा मंडल सहित पश्चिम मध्य रेलवे के सभी मंडलों में पूरी तरह से लागू हो जाएगी। इस नई प्रक्रिया का उद्देश्य तत्काल आरक्षण को अधिक पारदर्शी, सुविधाजनक और विवाद-रहित बनाना है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन के अनुसार, अब यात्रियों को टोकन के लिए दो-दो बार आरक्षण केंद्र के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। टोकन का वितरण अब सीधे तत्काल आरक्षण शुरू होने के समय के ठीक पहले किया जाएगा।
नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु और समय-सारणी:
- एसी (AC) श्रेणी: टोकन का वितरण सुबह 08:30 बजे से 09:00 बजे तक होगा। (प्रति काउंटर 10 टोकन)
- नॉन-एसी (Non-AC) श्रेणी: टोकन का वितरण सुबह 09:00 बजे से 09:30 बजे तक होगा। (प्रति काउंटर 15 टोकन)
- भीड़ और स्थानीय आवश्यकता के अनुसार टोकन की संख्या में बदलाव किया जा सकेगा।
- टोकनधारी यात्रियों की बुकिंग पूरी होने के बाद, यदि सीटें बचती हैं, तो अन्य यात्रियों को ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर टिकट दिए जाएंगे।
प्राथमिकता के आधार पर तय की गईं दो श्रेणियां (A और B):
टिकट दलालों पर नकेल कसने और आम यात्रियों को सुविधा देने के लिए रेलवे ने टोकन वितरण को दो श्रेणियों में बांटा है:
- श्रेणी ‘ए’ (प्राथमिकता): इसमें वे यात्री शामिल होंगे जो स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट ले रहे हैं। इन्हें टिकट बुकिंग में पहली प्राथमिकता मिलेगी।
- श्रेणी ‘बी’: इसमें अन्य सभी यात्री (जैसे किसी और के लिए टिकट लेने वाले) शामिल होंगे। इन्हें श्रेणी ‘ए’ के सभी यात्रियों की बुकिंग पूरी होने के बाद ही मौका मिलेगा।
पहचान पत्र की सख्त अनिवार्यता:
श्रेणी ‘बी’ का टोकन लेने के लिए आधार कार्ड या रेलवे द्वारा मान्य कोई अन्य फोटोयुक्त पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। वहीं, श्रेणी ‘ए’ में यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के लिए टिकट ले रहा है, तो उसे अपना पहचान पत्र दिखाने के साथ-साथ परिवार के सदस्य (यात्री) का ऐसा वैध पहचान पत्र भी दिखाना होगा, जिससे उनका पारिवारिक रिश्ता साबित होता हो। जारी किया गया टोकन अहस्तांतरणीय (Non-transferable) होगा, यानी टोकन जिसके नाम पर है, टिकट भी उसी को मिलेगा।
पुरानी तत्काल टिकट आरक्षण कराने की व्यवस्था यात्रियों के लिए काफी पीड़ादायक थी
अभी तक तत्काल आरक्षण की व्यवस्था बेहद अव्यवस्थित थी। यात्री विंडो खुलने के 12 घंटे पहले ही अपने फॉर्म एक के ऊपर एक रखकर चले जाते थे। जो जल्दी आता उसका फॉर्म ऊपर रहता। मजबूरी में यात्रियों को रात भर स्टेशन पर ही सोना पड़ता था ताकि कोई उनका फॉर्म न हटा दे।
इस व्यवस्था की पोल भवानीमंडी स्टेशन पर तब खुली, जब स्थानीय अध्यापक गजेंद्र सिंह जादौन ने रात में अपना फॉर्म लाइन में रखा था, लेकिन सुबह 5 बजे तक वह फॉर्म वहां से गायब हो गया। जब अध्यापक ने स्टेशन अधीक्षक के पास शिकायत पुस्तिका में इसकी शिकायत दर्ज करानी चाही, तो उन्हें पहले प्लेटफॉर्म टिकट के नाम पर 250 रुपये का जुर्माना भरना पड़ा, तब जाकर उनकी शिकायत दर्ज हुई।
जनसंदेश पोर्टल ने इस खबर और पुरानी व्यवस्था की खामियों को प्रमुखता से उठाया था। इसी घटना और यात्रियों की लगातार आ रही परेशानियों को संज्ञान में लेते हुए रेलवे प्रशासन ने यह नई, सुगम और पारदर्शी टोकन व्यवस्था लागू करने का ऐतिहासिक कदम उठाया है। रेलवे ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे नई व्यवस्था के तहत निर्धारित समय पर वैध फोटो पहचान पत्र के साथ ही आरक्षण केंद्र पहुंचें।

