कीचड़ में सने भवानीमंडी कि सब्जी मंडी के हालात: 20 मिनट की बारिश ने खोली व्यवस्था की पोल, तीन-तीन नगर पालिकाओं के बोझ तले दबे अधिकारी



भवानीमंडी।
झालावाड़ जिले का दूसरा सबसे बड़ा शहर भवानीमंडी इन दिनों प्रशासनिक अनदेखी और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव का दंश झेल रहा है। हालात यह हैं कि महज 20 मिनट की बारिश होते ही स्थानीय सब्जीमंडी दलदल में तब्दील हो जाती है, जिससे यहां पैर रखना तक दूभर हो जाता है।

कीचड़ से बदहाल सब्जी मंडी, हादसों को आमंत्रण

सब्जी मंडी में चारों ओर पसरे कीचड़ और गंदगी के कारण विक्रेता और खरीदार दोनों बेहद परेशान हैं। मंडी में आने वाले कई राहगीर और उपभोक्ता इस कीचड़ में फिसलकर गिर चुके हैं, जबकि कुछ लोग बमुश्किल संभलकर निकल पाते हैं।

अधिकारी का कहना : इस अव्यवस्था को लेकर जब नगर पालिका अधिकारी देवमित्र कानूनगो से बात की गई, तो उन्होंने कहां कि सोमवार को सब्जी मंडी की स्थिति में सुधार किया जाएगा। वहां मोटी पत्थर वाली गिट्टी व मलडा डालकर, ऊपर से बारीक चुरी बिछाई जाएगी और जमीन का समतलीकरण (लेवल) कर दिया जाएगा।

चौराहों पर अतिक्रमण, हादसे के इंतजार में प्रशासन

मंडी की बदहाली के साथ-साथ शहर के मुख्य चौराहों पर भी अव्यवस्था का बोलबाला है। भवानीमंडी के चार प्रमुख स्थानों—बालाजी चौराहा, गर्ल्स स्कूल चौराहा, बारह दुकान तिराहा और कालवा स्थान चौराहा—पर सब्जी विक्रेताओं ने अस्थाई रूप से दुकानें सजा रखी हैं। इसके चलते इन व्यस्त चौराहों पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और जाम की स्थिति बनी रहती है।

हैरानी की बात यह है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन रोजाना इस नजारे को देखते हैं, लेकिन इन चौराहों से अतिक्रमण हटाने की हिम्मत अब तक किसी ने नहीं दिखाई है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

एक अधिकारी, तीन नगर पालिकाएं: काम का अतिरिक्त बोझ

शहर की इस दुर्दशा के पीछे प्रशासनिक तंत्र का लाचार होना भी एक बड़ी वजह है। वर्तमान में नगर पालिका में ‘शहरी सेवा शिविर’ चल रहा है, लेकिन कर्मचारियों और अधिकारियों की भारी कमी है।
भवानीमंडी के अधिशासी अधिकारी (EO) को भवानीमंडी के साथ-साथ डग और पिड़ावा का भी अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
एक ही अधिकारी के अधीन तीन-तीन नगर पालिकाएं होने के कारण केवल अति-आवश्यक कार्य ही निपटाए जा रहे हैं।
सबसे ज्यादा बदतर स्थिति डग नगर पालिका की है, जो पहले ग्राम पंचायत थी और हाल ही में नगर पालिका बनाई गई है। खुद अधिकारियों का मानना है कि इस अतिरिक्त कार्यभार के चलते कई महत्वपूर्ण और विकास कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

राजनीतिक इच्छाशक्ति का भारी अभाव

भवानीमंडी की इस दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण यहां के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। वर्तमान में नगर पालिका अध्यक्ष का पद रिक्त चल रहा है, जिससे शहर का कोई धनी-धोरी नहीं है। वहीं दूसरी ओर, स विधायक का ज्यादातर ध्यान डग में ही केंद्रित रहता है। जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की कमी का खामियाजा आज भवानीमंडी की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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