भाजपा की 11 सदस्यीय चुनाव समिति में शामिल सदस्य क्या लड़ सकेंगे पार्षद का चुनाव ?
भाजपा ने भवानीमंडी पालिका चुनाव को लेकर कसी कमर, समिति में जिला अध्यक्ष-विधायक समेत स्थानीय नेताओं को दी जिम्मेदारी
भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल ) 9 सितंबर को होने वाले नगर पालिका चुनाव को लेकर भाजपा ने भवानीमंडी में पूरी तरह कमर कस ली है। संगठन ने चुनावी तैयारियों के तहत पहले दिनेश जैन को संयोजक और सुनीश दीक्षित को सह-संयोजक नियुक्त किया, इसके बाद प्रदेश भाजपा कार्यालय की ओर से रूपेश शर्मा, मानसिंह चौहान और निर्मल शर्मा को चुनाव प्रभारी बनाया गया। अब शनिवार को 11 सदस्यीय प्रस्तावित चुनाव समिति गठित किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि समिति में शामिल सदस्य स्वयं पार्षद का चुनाव लड़ सकेंगे या नहीं।
जिला अध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा और विधायक कालूराम मेघवाल सहित 11 सदस्यों वाली इस प्रस्तावित समिति में दो सदस्य बाहरी हैं, जबकि क्रम संख्या 5 से 11 तक भवानीमंडी के भाजपा नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष दिनेश जैन, पूर्व पार्षद सुनीश दीक्षित, निवर्तमान पार्षद प्रदीप जैन, प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष आफताब चौधरी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रामलाल गुर्जर, पूर्व पार्षद रंजीता पांडे तथा पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष विनय पोरवाल शामिल हैं।
खास बात यह है कि पहले से नियुक्त चुनाव संयोजक दिनेश जैन और सह-संयोजक सुनीश दीक्षित को भी प्रस्तावित चुनाव समिति में शामिल किया गया है। ऐसे में समिति में शामिल स्थानीय नेताओं के संभावित चुनाव लड़ने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जिला अध्यक्ष बोले—आवेदन का अधिकार सभी को
समिति के सदस्यों के पार्षद चुनाव लड़ने को लेकर जिला अध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा से सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है कि समिति में शामिल सदस्य चुनाव नहीं लड़ सकते। सभी को चुनाव लड़ने के लिए आवेदन करने का अधिकार है और समिति के सदस्य भी आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट देना अथवा नहीं देना पार्टी का निर्णय होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद पार्टी विचार करेगी कि समिति में शामिल सदस्यों को चुनाव लड़ाना है या नहीं।
जिम्मेदारी पहले, चुनाव बाद में
हर्षवर्धन शर्मा ने कहा कि पार्टी जब किसी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी देती है तो उसका जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करना चाहिए। पार्टी का आग्रह रहता है कि जिसे जो दायित्व मिला है, वह उसे पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाए। उन्होंने कहा कि समिति में शामिल नेताओं का पार्टी जहां अधिक उपयोग समझेगी, वहां उनकी सेवाएं ली जाएंगी।
ऐसे में भाजपा की 11 सदस्यीय प्रस्तावित चुनाव समिति में शामिल नेताओं के सामने संगठन की जिम्मेदारी और पार्षद चुनाव में दावेदारी—दोनों विकल्प खुले हैं। अब टिकट वितरण के समय यह देखना दिलचस्प होगा कि समिति के कौन-कौन से सदस्य चुनावी मैदान में उतरते हैं और पार्टी किसे प्रत्याशी बनाती है।

