भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )
दिल्ली-मुंबई 8-लेन एक्सप्रेसवे से भवानीमंडी को जोड़ने की मांग अब तक एक सुलगता हुआ सपना ही बनी हुई है। सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर तमाम कोशिशों के बाद भी जनता के हाथ सिर्फ छलावा और फाइलों का पुलिंदा ही लगा है। कभी केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय द्वारा नीमथूर से कनेक्टिविटी का ‘झुनझुना’ पकड़ाकर क्षेत्रीय सांसद दुष्यंत सिंह को पत्र थमा दिया जाता है, तो कभी धरातल पर हकीकत के नाम पर वही पुराना लेदी चौराहा मार्ग सामने आ जाता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह बहुप्रतीक्षित कनेक्टिविटी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी?
फाइलों में दफन प्रस्ताव, नेताओं के ‘आश्वासनों’ की सालगिरह
इस कनेक्टिविटी को अमलीजामा पहनाने के लिए आरएसएस के कद्दावर नेता प्रकाश चंद गुप्ता और व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह सहित प्रतिनिधियों ने पुरजोर कोशिशें की थीं। इसके बाद कोटा से राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के अधिकारियों ने मौका मुआयना किया और भवानीमंडी से महज 9 किलोमीटर दूर सातलखेड़ी को एक्सप्रेसवे से कनेक्ट करने का प्रस्ताव मंत्रालय को भेजा। लेकिन इस बात को एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, और फाइल पर धूल जमने के अलावा कोई प्रगति नहीं हुई।

इसी तरह, भाजपा कार्यकर्ता राजकुमार खरड़िया ने पूरी फाइल तैयार कर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सम्मुख रखी थी। श्रीमती राजे ने मामले को गंभीरता से तो लिया, लेकिन उनके उस ‘गंभीर’ आश्वासन को भी साल भर से ज्यादा का वक्त हो चुका है। परिणाम ढाक के तीन पात ही रहा।
विधायक का पक्ष: “प्रक्रियाधीन है मामला, फोरलेन की भी की है मांग”
इस पूरे मामले को लेकर जब डग क्षेत्र के विधायक कालूराम मेघवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया— “भवानीमंडी को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे 8-लेन से जोड़ने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा प्रस्ताव बनाकर मंत्रालय को भिजवा दिए गए हैं, यह पूरा मामला अभी प्रक्रियाधीन है। इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्री से सुकेत से डग (मध्य प्रदेश बॉर्डर) तक जो मेगा हाईवे है, उसको आगे उज्जैन से जोड़ने के लिए फोरलेन बनाने की मांग भी पूर्व में की जा चुकी है।”
क्या बोले अधिकारी?
दूसरी ओर, जब इस संबंध में एनएच कोटा के अधिकारी संदीप अग्रवाल से बात की गई, तो उनका वही रटा-रटाया जवाब सामने आया— “हमने प्रस्ताव बनाकर मंत्रालय को भेज रखा है, फिलहाल कनेक्टिविटी को लेकर कोई नया अपडेट नहीं है।”
रामगंजमंडी में ‘परोसा’, तो भवानीमंडी को क्यों ‘उपेक्षा’?
आगामी 8 जुलाई को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भवानीमंडी से महज 30 किलोमीटर दूर रामगंजमंडी के दौरे पर आ रहे हैं। चूंकि वह क्षेत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का है, इसलिए वहां की हर मांग चुटकियों में पूरी होने की उम्मीद है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि भवानीमंडी की इस जायज मांग का क्या होगा?
क्या भवानीमंडी के विधायक, सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस सुनहरे मौके को भी हाथ से जाने देंगे? प्रक्रियाधीन फाइलों के भरोसे बैठने के बजाय यदि अब भी हमारे जनप्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष एकजुट होकर भवानीमंडी की 8-लेन कनेक्टिविटी और सुकेत-डग फोरलेन की मांग को मजबूती से नहीं उठाया, तो यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से हमेशा के लिए पिछड़ जाएगा। अब जनता की नजरें नेताओं के दावों और गडकरी के इस दौरे पर टिकी हैं।

